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*ड्यूटी निभाने के लिए दरोगा को प्रतिमाह वेतन से अधिक खर्च करना पड़ता है यदि ईमानदारी दिखाएं तो नहीं चल पाएगा खर्च*

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*ड्यूटी निभाने के लिए दरोगा को प्रतिमाह वेतन से अधिक खर्च करना पड़ता है यदि ईमानदारी दिखाएं तो नहीं चल पाएगा खर्च*

इसके लिए सरकार अतिरिक्त पैसा नहीं देती

आईए देखते हैं नीचे प्रतिमाह कितना होता है खर्च

500 बयान कराने व अवलोकन के।
500 रुपये वारंट बनवाने के।
5000 सी ए दाखिल हाई कोर्ट।
15000-20000 लड़की चले जाने पर उसको लाने व बयान कराने के।
5000 पेट्रोल खर्चा।
500 अभियोजन अनुमति।
10000 अभियुक्त पकड़ने व रिमांड अन्य।
500 रुपये कोर्ट से फाइल निकल वाने मे।
1000 बेल लिखवाने के।
200 cs व FR दाखिल करवाने मे।
2500 गाय मर जाये उसको दबाने के लिए ।
5000 लावारिस शव के लिए।
2000 गुमशुदगी पेपर छपवाना व फोटो बनवाना।
3000 से 5000 रुपये वी आई पी ड्यूटी खर्चा।
3000 शव PM के लिए ले जाने व लाने खर्चा।
3000 रुपये सड़क पर एक्सीडेंट होने के बाद क्षतिग्रस्त वाहनों को सड़क से हटाने व उनको सुरक्षित स्थान पर ले जाने के लिए क्रेन का किराया।
3000 रुपये धारा 82,83 CRPC की कार्यवाही करने अन्य जनपद व राज्य मे जाना।
एक दारोगा महीने में इतना खर्च करता है ड्यूटी निभाने में।सरकार इनके लिए एक कौड़ी नहीं देती,उल्टे अधिकारी कहते हैं यह दारोगा की जिम्मेदारी है।
कैसे ईमानदारी की अपेक्षा की जाये।
एक दरोगा ने बड़ी ही इमानदारी से बेबाक टिप्पणी करते हुए अपनी पीड़ा को व्यक्त किया है यदि वास्तव में देखा जाए तो इन मुश्किलों का सामना तो उन्हें करना ही पड़ता है अगर ईमानदारी से इन खर्चों को अपने वेतन से देना शुरू करें तो उनके परिवार की जीविका चलाना भी मुश्किल हो जाएगा।

महाराजगंज से दिनेश मिश्रा की रिपोर्ट

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