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*डिजिटल जन्म प्रमाण पत्र की प्रक्रिया ने अपार आईडी जनरेशन की रोकी रफ्तार*

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संवाददाता, अकाश कुमार गुप्ता
जिला प्रभारी, महराजगंज
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*डिजिटल जन्म प्रमाण पत्र की प्रक्रिया ने अपार आईडी जनरेशन की रोकी रफ्तार*

यूपी के स्कूलों में ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री (अपार) आईडी बनाने की प्रक्रिया 62 फीसदी पहुंचने के बाद धीमी पड़ गई है। डिजिटल जन्म प्रमाण पत्र की अनिवार्यता और नाम व जन्मतिथि में भिन्नता के कारण बड़ी संख्या में छात्रों की आईडी अब तक नहीं बन पाई है। अभी तक 38 फीसदी छात्रों की आईडी नहीं बन पाई है।
जिले के 3475 बेसिक, माध्यमिक, वित्तविहीन, मदरसा व समाज कल्याण विद्यालयों में कुल नामांकन 4,66,613 है। इसके सापेक्ष केवल 2,89,300 छात्रों की ही अपार आईडी बन पाई है। यानी अब भी 38 फीसदी छात्रों की आईडी लंबित है, जिससे उनकी शैक्षिक पहचान अधूरी बनी हुई है।

डिजिटल जन्म प्रमाण पत्र के लिए अभिभावक लगा रहे चक्करः
छात्रों की अपार आईडी जनरेट करने के लिए डिजिटल जन प्रमाण पत्र आवश्यक कर दिया गया है। जिन छात्रों के पास नहीं है, उनके अभिभावकों को ग्राम प्रधान, गवाह, सेक्रेटरी तहसील के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। प्रक्रिया लंबी और जाटल होने के कारण कई छात्रों का प्रमाण पत्र अब तक नहीं बन सका है, जिससे उनकी आईडी अटकी हुई है।नाम और जन्मतिथि में भिन्नता बनी बड़ी समस्याः

शिक्षकों के अनुसार आधार और स्कूल रिकॉर्ड में दर्ज नाम और जन्मतिथि में अंतर के कारण भी अपार आईडी बनाने में दिक्कत हो रही है। कई मामलों में आधार कार्ड में नाम की स्पेलिंग अलग है, जबकि स्कूल रिकॉर्ड में कुछ और दर्ज है। इसी तरह, जन्मतिथि में अंतर होने के कारण आईडी जनरेट नहीं हो पा रही है। तहसील से डिजिटल जन्मतिथि बनवाने में डेढ़ से दो माह का वक्त लग रहा है। आधार सुधार में प्रपत्रों की व्यवस्था व प्रॉसेसिंग में भी विलंब हो रहा है।

स्कूलों पर बढ़ा दबाव, कार्रवाई की चेतावनीः

शिक्षा विभाग ने अपार आईडी जनरेशन को लेकर शिक्षकों दबाव बनाना शुरू कर दिया है। कई शिक्षकों का वेतन रोव की चेतावनी दी गई है, जिसके चलते कुछ ने आधार कार्ड दर्ज जन्मतिथि के अनुसार ही आईडी बना दी। लेकिन स्कूल रिकॉर्ड से यह मेल नहीं खाने के कारण भविष्य में छात्रों को
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रिकॉर्ड से यह मेल नहीं खाने के कारण भविष्य में छात्रों को परेशानी हो सकती है। जिले में 123 निजी विद्यालय ऐसे चिह्नित हैं, जहां अपार आईडी बनाने की रफ्तार बेहद कम है। इसमें से 22 स्कूल ऐसे हैं जहां पढ़ने वाले बच्चों में से 11 फीसदी का भी अपार आईडी जनरेट नहीं हो पाई है।समस्या समाधान के प्रयास जारीः

शिक्षा विभाग का कहना है कि यू-डायस पोर्टल को अपडेट किया जाएगा, जिससे जन्मतिथि व नाम की भिन्नता की समस्या को हल किया जा सके। साथ ही, डिजिटल जन्म प्रमाण पत्र बनाने की प्रक्रिया को तेज करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। अधिकारी अभिभावकों से अपील कर रहे हैं कि वह जल्द से जल्द अपने बच्चों के आधार कार्ड में सही नाम और जन्मतिथि अपडेट करवाएं और डिजिटल जन्म प्रमाण पत्र बनवाएं, ताकि अपार आईडी जनरेट करने में कोई समस्या न आए। बीआरसी पर आधार बनाया लेख रहा है।

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