*हत्या को आत्महत्या (पुलिसिया उत्पीड़न) को लेकर सौंपा पत्रक*
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मिर्जापुर से बसन्त कुमार गुप्ता की रिपोर्ट
मिर्जापुर :17 फ़रवरी 25 *हत्या को आत्महत्या (पुलिसिया उत्पीड़न) को लेकर सौंपा पत्रक*
आज राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग के लोगों ने राज्यपाल को संबोधित पत्रक जिलाधिकारी को दिया गया जिसमें कहा गया कि कि 01 फरवरी 2025 को स्नेहा सिंह कुशवाहा पुत्री सुनील सिंह कुशवाहा तकिया, सुनील सिंह कुशवाहा के अनुसार उनकी बेटी स्नेहा सिंह कुशवाहा 17 वर्ष की प्लाट नं 160 जवाहर नगर, एक्सटेंशन कालोनी, दुर्गाकुण्ड, भेलूपुर, काशी कमिश्नरेट वाराणसी में रामेश्वर पाण्डेय व आशुतोष पाण्डेय द्वारा बलात्कार कर हत्या कर दिया गया। जब हमें इस बात की जानकारी होती है तो हम लोग घटनास्थल पर पहुंचते है तो यह देखते हैं कि पहले से पंचनामा करके पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया जाता है। हमें पोस्टमार्टम से पहले या उसके बाद भी मेरी बेटी को नहीं देखने दिया गया और हम लोगों ने कहा कि हमें अपनी बेटी को घर ले जाना है, मगर पुलिस प्रशासन ने सैकड़ों पुलिस को लगाकर जबरदस्ती मेरी बेटी को हरिश्चन्द्र घाट पर ले जाया गया और जबरदस्ती अन्तिम संस्कार करवाया गया मेरी बेटी को मुझे देखने भी नहीं दिया गया। भेलूपुर थाना प्रभारी व अन्य पुलिस ने अपशब्द बोलते हुए गंवार, अनपढ़, बिहारी कहते हुए तेरी बेटी ने आत्महत्या की है। मेरा एफआईआर भी 01 फरवरी 2025 को नहीं लिखा गया और कहा कि आत्महत्या की कोई रिपोर्ट नहीं लिखी जाती है जबकि मेरी बेटी रात में अपनी मौसी व परिवार के अन्य लोगों से फोन पर वीडियो काल पर बात करती है और 01 फरवरी 2025 को उसे घर आना था, क्योंकि 04 फरवरी 2025 से उसकी परीक्षा थी। सुबह बेटी की मृत्यु की सूचना रामेश्वर पाण्डेय द्वारा दी गई। फोटो से साफ पता चलता है कि मेरी बेटी के साथ बलात्कार कर हत्या करके टांग दिया गया। तभी तो मेरे पहुंचने से पहले पंचनामा पुलिस द्वारा कर दिया गया। मेरी बेटी के गले में सोने के चेन व अन्य आभूषण थे जब मुझे दिया गया तो जो हमने अपनी बेटी को आभूषण दिया था वह था ही नहीं जब इस पर मैंने आब्जेक्शन किया तो वह वापस रख लिया गया और मेरी बेटी का आभूषण मुझे 06 फरवरी 2025 को दिया गया। हमारी एफआईआर 10 फरवरी 2025 को लिखी गई। एफआईआर हत्या में दर्ज की गई मगर कार्रवाई नहीं की जा रही है। मुझे ऐसा प्रतीत होता है कि थाना प्रभारी, जांच अधिकारी, मेडिकल आफिसर व अन्य अधिकारीगण आरोपी को बचाना चाहते है और साक्ष्य को मिटाने का काम किया है।
अतः आपसे निवेदन है कि इस घटना की जांच करने के लिए उच्च स्तर कमेटी बनाकर जांच कराई जाए और दोषियों को सजा दिया जाएं ताकि जनता का न्यायिक व्यवस्था पर विश्वास बना रहें। यदि 07 दिनों में उच्च स्तरीय जांच कमेटी नहीं बनाई गई तो उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में उग्र आन्दोलन होगा जरूरत पड़ी तो उत्तर प्रदेश बन्द भी किया जाएगा। जिसकी जिम्मेदार उत्तर प्रदेश के शासन-प्रशासन की होगी ।
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