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*खनन माफियाओं ने नदियों को बनाया समुद्र,अब बाढ़ बचाव की कवायद*

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*खनन माफियाओं ने नदियों को बनाया समुद्र,अब बाढ़ बचाव की कवायद*

 

सतीश त्रिपाठी।
महराजगंज।
सरकार चाहे जो हो, लेकिन बार्डर क्षेत्र मे मिट्टी खनन माफियाओं का हमेशा से दबदबा रहा है। इस बार खनन माफिया खेतों की मिट्टी ही नहीं, बल्कि रोहिन,चन्दन,झरही नदियों एवं डूडी नाले के नदी क्षेत्र में 10 से 15 फीट गहराई तक मिट्टी खनन करते और बेचते हुए रातों-रात लखपति बन बैंठे । यह अवैध खनन का कार्य स्थानीय प्रशासन, खनन माफिया, एवं कुछ खादी वर्दीधारी के तिकड़ी मे फलता फूलता रहा । अब जब उक्त नदियों को खनन माफिआयों ने समुद्र का रूप दे दिया। तो अब बाढ़ से बचाव की कवायद शुरू हो चुकी है। रोहीन नदी के श्यामकाट,लक्ष्मी नगर, चकदह के निकट ,सेमरहवा के नदी घाट के निकट,गनवरिया के निकट की बहने वाले नदियां एवं नाले पूरा का पूरा समुद्र में तब्दील हो गई है। बरसात का मौसम शुरू हो चुका है। यदि बाढ़ ने अपना भयावह रूप लिया तो, सैकड़ो गांव का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। अब जब बरसात का मौसम शुरू हो गया है तो स्थानीय प्रशासन बाढ़ से बचाव की तैयारी में जुटा हुआ है। तरह-तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। बाढ़ से बचाव के लिए किसानों और क्षेत्रीय जनता को जागरूक किया जा रहा है। लेकिन यही क्षेत्रीय जनता तहसील मुख्यालय पर जब खनन माफिआयों के विरोध मे धरना प्रदर्शन तक किया तो उस समय प्रशासनिक अधिकारियों के कानों पर जू तक नहीं रेंगा।और खनन माफियाओं का कार्य बेखौफ चलता रहा । अवैध खनन को लेकर पिछले दिनों खैराटी गांव में खनन माफियाओं और ग्रामीणों के बीच लाठी-डंडे भी चले लेकिन प्रशासन मूकदर्शक बना रहा। जिस तरह प्रशासन मूकदर्शक बन कर धरना, प्रदर्शन, मारपीट का तमाशा देखता रहा उससे तो कोई भी अनुमान लगा सकता है कि प्रशासन की कहीं ना कहीं मिलीभगत थी। यदि ऐसा नहीं होता तो रोहिन नदी के किनारे दर्जनों गांव के घाट आज समुद्र का रूप ले चुके हैं। नौतनवा तहसील प्रशासन आज बाढ़ बचाव के लिए तरह-तरह के कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। यदि खनन माफियाओं पर शिकंजा कसने की कोशिश किया होता तो शायद बाढ़ की विभिषिका को रोका जा सकता था। नौतनवा तहसील क्षेत्र की जनता बाढ़ तांडव न हो इसके लिए ईश्वर से मनौती भी कर रहा है। नौतनवा तहसील में इस बार माफियाओं ने सारी हदें पार कर दीं। नदी के किनारे गांवों में बाढ़ से बचाने के लिए बने बन्धो को भी नही छोड़ा। कई बंधे की मिट्टी पर भी खनन माफिया की नजर लग गई थी।और इसकी खुदाई कर डाली गई। रात के अंधेरे में रोजाना खनन होता रहा। लेकिन प्रशासनिक अधिकारी पूरी तरह मूकदर्शक बने हुए थे । 10 से 12 फीट नदियों के किनारे खेतों के अलावा नदियों में खुदाई कर एक प्राइवेट कंपनी के आड़ में उसे बेचा गया और रातों-रात लोग लखपति बन गए।

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