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*सहजनवा तहसील क्षेत्र के पाली पिपरौली सहजनवा में अवैद्य तरह संचालित हो रहे हॉस्पिटल , पैथोलॉजी,व अल्ट्रासाउंड सेंटर*

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*सहजनवा तहसील क्षेत्र के पाली पिपरौली सहजनवा में अवैद्य तरह संचालित हो रहे हॉस्पिटल , पैथोलॉजी,व अल्ट्रासाउंड सेंटर*

*फर्जी प्राइवेट अस्पताल व पैथोलॉजी अल्ट्रासाउंड सेंटरो का कुकुर मुत्तेकी तरह भरमार*

*सूत्रों के द्वारा मिली जानकारी के अनुसार*

अवध नगरी संवाददाता पाली गोरखपुर जनपद के सहजनवा तहसील क्षेत्र के पाली, पिपरौली, सहजनवा ब्लॉको में
*सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अगल बगल के थोड़ी ही दूरी पर लगभग 1 से 2 किलोमीटर के दायरे में
जगह-जगह प्राइवेट अस्पताल अवैध तरह से संचालित हो रहा है। और
पैथोलॉजी लैब खोली गई और इनकी संख्या में तेजी से इजाफा भी होता जा रहा है। बिना रजिस्ट्रेशन हुआ अधिकृत मान्यता न होने के बावजूद संचालित हो रही पैथोलॉजी अल्ट्रासाउंड लैब की जानकारी होने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदार कार्रवाई नहीं कर रहे हैं अगर देखा जाए
दर्जनों से अधिक की संख्या में पैथालॉजी व लैब संचालित हो रहा है वहीं कुछ लैब टेक्निशियनों द्वारा भी पैथोलॉजी अल्ट्रासाउंड लैब चलाए जा रहे हैं लेकिन अधिक संख्या में वैसे
पैथोलॉजी अल्ट्रासाउंड लैब फर्जी तरीके से संचालित हो रहे हैं तीनों ब्लॉको, में फर्जी पैथोलॉजी व लैब, सरकारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र व नगर पंचायत सहजनवा घघसरा बजार व पिपरौली बजार के आसपास कुकुरमुत्ता की तरह प्राइवेट अस्पताल भी संचालित हो रहा है
जो की स्वास्थ्य विभाग पैरामीटर की विपरीत के मानक की धज्जियां उड़ाते दिखाई दे रहा है। के प्राइवेट अस्पताल स्वास्थ्य विभाग के किसी भी मानक को पूर्ण रूप से पूरा नहीं करता। अगर देखा जाए
जहां एक तरफ मरीजों का आर्थिक शोषण होता है वही उनके द्वारा किए गए जांच की गलत रिपोर्ट होने से मरीजों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ता हैं। और जांच कर रहे हैं और रिपोर्ट भी बना कर दे रहे हैं। इतना ही नहीं उस रिपोर्ट पर किसी डॉक्टर का हस्ताक्षर ले लेते हैं यह डॉक्टर कौन होता है कौन नहीं जानता सभी की रिपोर्ट में किसी न किसी डॉक्टर का हस्ताक्षर रहता है जबकि ऐसे कई जांच है *जो सिर्फ एमडी पैथोलॉजी ही कर सकते हैं।* केवल अस्पताल के कुछ दूरी पे ही दर्जनों ऐसे लैब संचालित है जिन पर कहीं कोई साइन बोर्ड तक नहीं लगा है यह डॉक्टर के पास कार्यरत स्टाफ की मिली भगत से मरीज को लैब तक लाते हैं पाली ब्लॉक में कुछ ऐसे पैथोलॉजी लैब भी चल रहे हैं जो किसी ऐसे डॉक्टर के नाम पर रजिस्टर है जो यहां तक रहते नहीं है उन लैब से नौसीखिए खून निकल रहे हैं। अगर सूत्रों की माने की तो दूसरी तरफ मरीज को बरगला बहला फुसला कर अस्पताल पर कार्यरत कुछ आशा भी उनके साथ जमकर खिलवाड़ करती हैं । वही आए हुए मरीज
बधे कमीशन वाले पैथोलॉजी व प्राइवेट अस्पतालों पर जाने पर मजबुर हो जाते है और आशा बड़े ही शौक से मरीजों को भेजने का कार्य करती हैं। इतना ही नहीं सरकारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में फर्जी स्वास्थ्य कारोबारियों की
भी गुर्गे भी सुबह से लेकर शाम के तक अस्पतालों में डेरा जमाए रखते हैं। वही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ठर्रा पर पाली
अस्पताल के ओपीडी के पास सीसी कैमरा भी नहीं लगा है। अगर सीसी
कैमरा लगा होता है तो दलालों का पोल खुल ने में तनिक भी देरी नही होता सारा कारनामा स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारों के सामने होता। अवैध तरह से संचालित हो रहे प्राइवेट पैथोलॉजी व प्राइवेट अस्पताल व लैब में
जहां पर मरीजों का जमकर शोषण किया जाता है। और मनमानी तरीके से भारी रकम भी वसूले जाते हैं अगर सूत्रों के माने हो रहे अवैध प्राइवेट अस्पताल व पैथोलॉजी लैब को कुछ डाक्टर व कुछ आशा के भरोसे संचालित करने में पूर्ण रूप से भरपूर सहयोग मिलता है। यहां तक कुछ सरकारी डॉक्टर भी प्राइवेट क्लीनिक चलाने में बेहतर तरीके से सफल दिख रहे है।
दूसरी तरफ सरकारी अस्पतालों पर सुबह से ही दलालों का ताता लगा रहता है आते ही मरीजों को अपने-अपने पैथोलॉजी व लैब पर ले जाने की तैयारी में जुटे रहते हैं दलाल
अब देखना है की स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अपनी जिम्मेदारियां को किस तरह निभाते हैं। इन अवैध स्वास्थ्य कारोबारियो पर कार्रवाई करते हैं। या फिर लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ करने के लिए संचालित होने देंगें।

*वही संदर्भ में गोरखपुर के सीएमओ डॉक्टर आशुतोष दुबे से जानकारी ली गई*
*उन्होंने कहा कि जल्द ही इक नई टिम गठित कर अवैध तरह से संचालित हो रहे प्राइवेट अस्पताल व पैथोलॉजी व लैब पर कारवाई की जाएगी।*

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